शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017

najriya

Hello dost


*सब के दिलों का*
*एहसास अलग होता है ...*

*इस दुनिया में सब का*
*व्यवहार अलग होता है ...*

*आँखें तो सब की*
*एक जैसी ही होती है ...*

*पर सब का देखने का*
*अंदाज़ अलग होता है ...*

aarksan

Hello dosto

*आरक्षण

यह पोस्ट,   अनु- सूचित जाति या जन- जाति   से सम्बन्धित  लोगो के लिए  पढना मैनडेटरी  है । क्योंकि   इस  सामंतवाद   को खत्म करने  के  लिए  यह  जानना जरूरी  है कि सामंतवादी लोगों ने  इस  वर्ण  पर   क्या क्या  अत्याचार  किए थे।  जान कर आपके रोंगटे  खड़े हो जाएंगे।  इस   देश मे अंग्रेजी    शासन   नही   आता    तो    अनुमान    नही लगा    सकते  आज  क्या    हालत   होती । वैसे   अभी  भी   कोई   कसर   बाकि नही है।    आप      से   करबद्ध  अनुरोध  है  कि आप को   जब   भी  समय मिले   तो  यह   पोस्ट  जरूर जरुर  पढे ।*
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अंग्रेजों ने भारत पर 150 वर्षों तक राज किया ब्राह्मणों ने उनको भगाने का हथियार बन्द
आंदोलन क्यों चलाया?
जबकि भारत पर सबसे पहले हमला मुस्लिम
शासक मीर काशीम ने 712 ई. में किया! उसके बाद महमूद   गजनबी, मोहमंद गौरी, चन्गेज खान ने हमला किए और फिर  कुतुबदीन   एबक, गुलामवंश, तुगलकवंश, खिलजीवंश, लोदीवंश
फिर मुगल आदि वन्शो
ने भारत पर राज किया
और   खूब    अत्याचार
किए  लेकिन ब्राह्मण ने
कोई क्रांति या आंदोलन
नही चलाया ! फिर
अन्ग्रेजो के खिलाफ़ ही
क्यों क्रांति कर दी ।

*जानिये  क्रांति   और  आंदोलन की वजह ।*

1- अंग्रेजो  ने    1795
में अधिनयम 11  द्वारा
शुद्रों  को   भी    सम्पत्ति
रखने का कानून बनाया।

2- 1773 में ईस्ट इंडिया
कम्पनी ने रेगुलेटिग एक्ट पास किया जिसमें न्याय
व्यवस्था समानता    पर
आधारित थी ।  ।6 मई 1775 को  इसी  कानून द्वारा बंगाल के सामन्त ब्राह्मण  नन्द कुमार देव को फांसी हुई थी ।

3- 1804 अधिनीयम 3 द्वारा   कन्या  हत्या   पर रोक   अंग्रेजों  ने  लगाई (लडकियों के पैदा होते ही तालु में अफीम चिपकाकर, माँ के
स्तन पर धतूरे का
लेप लगाकर, एवम्
गढ्ढा बनाकर उसमें दूध डालकर डुबो कर मारा जाता था ।

4- 1813 में ब्रिटिश सरकार ने कानून बनाकर शिक्षा ग्रहण करने का सभी जातियों और धर्मों के लोगों को अधिकार दिया।

5- 1813 में  ने दास प्रथा का अंत कानून बनाकर किया।

6-  1817  में     समान नागरिक संहिता कानून बनाया ।   1817    के पहले सजा का प्रावधान वर्ण के आधार पर था। ब्राह्मण को कोई   सजा नही होती थी ओर   शुद्र को   कठोर   दंड   दिया
जाता था। अंग्रेजो      ने सजा का प्रावधान समान कर दिया।

7- *1819 में अधि- नियम  नम्बर  7 द्वारा ब्राह्मणों  द्वारा    शुद्र  स्त्रियों के शुद्धिकरण पर रोक लगाई।*  (शुद्रों की शादी होने पर दुल्हन को अपने यानि दूल्हे  के घर न जाकर कम से कम तीन रात  ब्राह्मण के घर शारीरिक   सेवा देनी पड़ती थी।)

8- *1830 नरबलि प्रथा पर रोक -* (देवी देवता को प्रसन्न करने के लिए ब्राह्मण शुद्रों,  स्त्री   व् पुरुष दोनों को मन्दिर
में सिर पटक पटक कर
चढ़ा देता था। )

9- 1833   अधिनियम 87 द्वारा सरकारी सेवा में भेद भाव   पर   रोक अर्थात  योग्यता ही सेवा का  आधार     स्वीकार किया गया तथा कम्पनी केअधीन किसी भारतीय
नागरिक     को     जन्म स्थान, धर्म, जाति या रंग के आधार   पर   पद  से वंचित  नही   रखा    जा सकता है।

10- 1834  में   पहला भारतीय  विधि  आयोग का गठन हुआ । कानून
बनाने   की     व्यवस्था जाति,  वर्ण,  धर्म  और क्षेत्र की भावना से ऊपर उठकर  करना   आयोग का प्रमुख उद्देश्य था।

11-  *1835  प्रथम  पुत्र को गंगा दान पर रोक !*   (ब्राह्मणों ने नियम बनाया  की शुद्रों के घर यदि पहला बच्चा लड़का पैदा हो तो  उसे गंगा में फेंकदेना चाहिये।
पहला पुत्र ह्रष्ट-पृष्ट एवं
स्वस्थ पैदा होता है।यह
बच्चा ब्राह्मणों से लड़ न
पाए इसलिए पैदा होते ही गंगा को दान करवा देते थे। )

12- 7 मार्च 1835 को
लार्ड मैकाले ने   शिक्षा
नीति राज्य  का  विषय
बनाया और उच्च शिक्षा
को   अंग्रेजी   भाषा का
माध्यम  बनाया  गया।

13- 1835 को कानून बनाकर अंग्रेजों ने शुद्रों को कुर्सी पर बैठने का अधिकार दिया।

14- दिसम्बर 1829 के
नियम 17 द्वारा विधवाओं को जलाना अवैध घोषित कर सती प्रथा का अंत किया।

15- देवदासी   प्रथा पर
रोक लगाई। ब्राह्मणों के
कहने   से  शुद्र   अपनी
लडकियों को मन्दिर की
 सेवा के लिए  दान  देते थे। मन्दिर  के   पुजारी उनका शारीरिक शोषण करते थे। बच्चा पैदा होने पर उसे  फेंक देते थे।और उस बच्चे को हरिजन नाम  देते थे।
1921 को जातिवार जनगणना के आंकड़े के अनुसार अकेले मद्रास में कुल जनसंख्या 4 करोड़
 23 लाख थी जिसमें 2
लाख देवदासियां मन्दिरों में पड़ी थी।  यह प्रथा अभी भी दक्षिण भारत के मन्दिरो  में  चल रही है।

16- 1837 अधिनियम द्वारा ठगी प्रथा का अंत किया।

17- 1849 में कलकत्ता
 में एक बालिका विद्यालय जे ई डी बेटन ने स्थापित  किया।

18-  1854 में अंग्रेजों ने  3 विश